और हमें देखो ,हमारे हिस्से में दूरियां आईं ।
उन दिनों हमें न तो कोई खबर थी न होश ,
उनकी अज़ीम औ पाक रोशनाई से रहे महरूम ।
उनकी शहद सी मीठी आवाज भी न सुन सके,
जाने कौन सी दुनिया में रहते थे हम ग़ुम।
हमें होश तो तब आया जब टीवी में उन्हें देखा,
उनके दुनिया से रुखसत हुए हो गए जब दो साल।
क्या कहें कैसी बिजली सी गिरी होश हवास पर,
उनकी जुदाई ने कर दिया हैं इस कदर बेहाल ।
सोचो ! कितना अच्छा मौका था जो गंवा दिया,
हमारी उनसे एक छोटी ही सही एक मुलाकात ।
जो हो जाती तो जिंदगी में हमारी बहार आ जाती ,
एक याद प्यारी सी संजो के रखते ,औ उनकी हर बात।
वो तो न हो सका , मुलाकात बस ख्वाबों में रह गई,
ख्वाबों में भी अब तो वो नहीं आते ,बहुत दूर चले गए। उनकी जुदाई से समझौता करके हम जैसे तैसे जी गए।
जिंदगी के सफर में भले ही हम आगे निकल आए,
अपनी मंजिल और घर की जिम्मेदारियों में खो गए।
मगर अब भी दिल के किसी कोने में एक दर्द बाकी है,
अपनी जिंदगी का पहला प्यार अब तक न भूल पाए।
उम्र दराज थे वो हमसे ,हम उनका एहतराम करते है ।
उनकी शहद सी मीठी आवाज,उनके नगमों से प्यार अब भी करते है।
उनकी नेकनामियों ,तहजीब ,शराफत और बड़ा दिल ,
उनकी ऊंची शख्सियत किसी फ़रिश्ते सी लगे हमको ।
उनकी प्यारी सी ,मासूम सी सूरत देखते हैं जब हम,
आसमान से भी हसीन बेदाग़ चाँद लगते हैं वो हमको।
न मिलना हुआ हमें उनसे इस जन्म में तो क्या ,
हमारी किस्मत का सितारा इतना बुलंद न था ।
मगर अगले किसी जन्म में मिलाये हमें खुदा ,
यही अरमान अब तलक मन में पाला हुआ था।
मगर खुदा को और हमारी किस्मत को क्या मंजूर है !
यह हमें क्या मालूम ,हम तो उसके गुलाम है ।
बहरहाल वो जहां रहे खुश रहे ,आबाद रहे ,
उनकी पाकीज़ा रूह के लिए हमारी दुआ सलाम है।


